शायरी
- Get link
- X
- Other Apps
विज्ञापन
दिल को छू लेने वाले हिंदी ग़ज़लों के चुनिंदा शेर.....

विज्ञापन
वैसे तो 'ग़ज़ल' उर्दू साहित्य की अत्यंत लोकप्रिय विधा रही है, जिसका मतलब होता है माशूका से गुफ्तगू। समय के साथ यह विधा हिंदी में भी आई और अब हिंदी में भी ग़ज़ल उतनी ही स्वीकार्य है जितनी कि उर्दू में। हिंदी में दुष्यंत कुमार और अदम गोंडवी जैसे शायरों ने ग़ज़ल को जीवन विभिन्न संघर्षों से जोड़ा है। यह एक ऐसी काव्यविधा रही है जिसमें चंद शब्दों में ही अपनी बातें कहने की क्षमता होती है। पेश है हिंदी ग़ज़लों के बेहतरीन शायरों के चुनिंदा शेर.....
अपना दरवाज़ा ख़ुला रखता है हमेशा 'नीरज'
ज़िंदगी आती है, आती है मगर चुपके से
~नीरज
जगह, कुदाल, कुआं सब तलाश कर लेंगे
मैं सिर्फ़ सोई हुई प्यास को जगाता हूं
~ देवेन्द्र कुमार आर्यविज्ञापनकुछ तो अपने और मेरे दरमियां रहने दे
दूरियां चुभती हैं, फिर भी दूरियां रहने भी दे
~ राजगोपाल सिंह
पानी को काग़जों में बांधने की ज़िद न कर
मन है, इसे हदों में बांधने की ज़िद न कर
~कुंवर बेचैन
ऐसी काई है अब मकानों पर
धूप के पांव भी फिसलते हैं
~सूर्यभानु गुप्तउम्रभर कच्ची रहगुज़ारों पर
आहटें सूंघता है सन्नाटा
~सूर्यभानु गुप्त
ख़ुद से रूठे हैं हम लोग
टूटे-फूटे हैं हम लोग
सत्य चुराता नज़रें हमसे
इतने झूठे हैं हम लोग
~शेरजंग गर्ग
समय ने जब भी अंधेरों से दोस्ती की है
जला के अपना ही घर, हमने रोशनी की है
~नीरजजब दोस्त कह दिया है तो फिर ख़ामियां न देख
टुकड़ों में जो क़ुबूल हो वो दोस्ती नहीं
~रमेन्द्र जाखू 'साहिल'
हमने तन्हाई में ज़ंजीर से बातें की हैं
अपनी सोई हुई तक़दीर से बातें की हैं
तेरे दीदार की हमको क्या तमन्ना होगी
ज़िंदगी भर तेरी तस्वीर से बातें की हैं
~बलबीर सिंह रंग
मुझमें रहते हैं करोड़ों लोग चुप कैसे रहूं
हर ग़ज़ल अब सल्तनत के नाम एक बयान है
~दुष्यंत कुमारतुम्हारे पांव के नीचे कोई ज़मीन नहीं
कमाल ये है कि फिर भी तुम्हें यक़ीन नहीं
~दुष्यंत कुमार

Comments
Post a Comment